दांत का दर्द क्या होता है कोई मुझ से पूछे......!
इस तकलीफ से जो में गुजारी हु कोई दुश्मन भी न गुजरे..हुआ यूँ
की प्यारी सी सन्डे की सुबह थी..और मैंने बिस्तर से उठ कर अंगडाई लेते हुए जैसे ही मुह खोला की.....आआआआअ जम्हाई की जगह ऊई मा ये कैसा दर्द मेरे जबडे में हुआ!!
"क्या हुआ मम्मी क्या बेड से गिर गई!!" रिंकू ने पुछा...
नहीई..... आअह्ह्ह मेरा दांत दर्द कर रहा है...
"ओह फ़िर ठीक है..."रिंकू ने तसल्ली से बोला
मैंने उसकी तरफ़ गुस्से से देखा...
हे भगवान्..डेंटिस्ट की भयंकर तस्वीर मेरे जेहें में तैर गयी...
"अब क्या होगा!"
"अरे कुछ नही होगा में नम्बर ले लेता हु डेंटिस्ट का तुम तैयार हो जाओ!!"हमारे इकलोते पति ने तसल्ली दी।
कैसे तैयार हो जाऊं..डेंटिस्ट के तो पिछले १५ साल से नही गयी...इक बार जो बचपन में इक डॉक्टर ने खीच क दांत उखाडा था उसका दर्द याद आ गया॥
दुखी मन से इक हाथेली बाएं गाल पे रख तयार होने लगी..
सन्डे का सत्यानाश हो गया क्या क्या रात को सपने सजाये थे..दिएर से जागेंगे आलू कचोडी लालाजी की खाना जायेंगे..दिन में कड़ी पकोडा.....उफ्फ्फ
"अरे मम्मी कुछ नही होगा ..डॉक्टर अंकल सुई चुबयेंगे बस और दांत दर्द गाएब..."
"तू तसल्ली दे रहा है या डरा रहा है!! "मै गुस्से मै बोली..हाय बोला बी नही जा रहा...
अपने पत्देव के साथ स्कूटर पे बैठ कर जैसे ही क्लीनिक पहुची तो पहले से ही दात दर्द के मारो की भीड़ जमा थी
"जी क्या नम्बर है"पतिदेव ने रिसेप्शन पर बैठी लड़की से पुछा
"५ वा "
ओह्ह....तब तक तो मै बेहोश हो जाउंगी दर्द क मारे...
गाल पर हाथ रख मैंने भरी पग भरे सीट को ओर।
तभी अंदर से आवाज आई ....आआआह्ह्ह्ह्ह
मेरे होश उड़ गए...भगवान् आज बचाले कभी कुछ नही मांगूगी जिंदगी भर ..मैं मन मन मै बोली
"बाहर चलते है न अभी दिएर है नम्बर आने मे"
मैंने पतिदेव को सुझाव दिया तबी रिसेप्शनिस्ट चिल्लाई
"नम्बर 5"
"चलो अंदर नम्बर आ गया "
घबराते हुए मैं अंदर के कमरे मे दाखिल हुई
इक भयंकर पुरूष मुह पर नकाब लगाये अपने औजारों को हाथ मे लिए जैसे मेरा ही इंतज़ार कर रहा हो
मुझे पसीने आने लगे..."चलो"पतिदेव ज़ोर देने लगे॥
"ठीक है वापिस चलो"मे पलटी
"वहां नही यहाँ"
(नही.....मे मन मे जय माता की जय माता की बोलने लगी)
आईये आईये ..क्या तकलीफ है आपको बैठिये .उसने लम्बी से सीट की तरफ़ इशारा किया
मे सकुचाते हुए बैठी ओर बोली "दत मे दर्द है इस तरफ़.."
"मुह खोलिए आआ "
आआ ओह बाएं गाल मे दाड़ की तरफ़ चिला हुआ है अकाल दाड़ घिसनी पड़ेगी या निकाल ही दूँ!!
"नाह्ह नही डॉक्टर साब घिस ही दीजिये "मैं बोली
"अरे निकलवा दो न बाद मे भी निकल्वाली पड़ेगी"पतिदेव बोले
मैं गुस्से मे उनकी तरफ़ देखि "नही डॉक्टर साब घिस ही दो
"ठीक है मुह खोलिए" अपना ड्रिलर लेकर वो तैयार हुए
इक लम्बी से चम्मच उन्होंने मेरे दांत की तरफ़ फसे ओर गर्र्र्र मैंने डर से आँखें बंद कर ली .लीजिये हो गया कुल्ला कर लीजिये आप नाहक ही डर रही थी . ये दवाई लीजिये दर्द बढे तो खा लेना ४-४ घंटे मे "
मे गाल पे हाथ रखते हुए उठी "थन्क यू डॉक्टर साब "
बच गयी हे माँ बचा लिया तुमने "मैं मन ही मन माँ का धन्यवाद दिया
"अभी नही तो २-३ महीने बाद आना ही पड़ेगा दांत निकलवाने"पतिदेव स्कूटर पे बैठते ही बोले
"अज्जी चुप करो मैं नही आउंगी दुबारा ओर दांत तुम निकलवा लेना मेरी जगह"
वोह मुस्कुरय की डॉक्टर ने उनका बदला इतने सालो का ले ही लिया .
ओर मै हाय हाय करते हुए घर को रवाना हुई "अब नही आउंगी पक्का "
घर पहुची तो रिंकू ने दरवाज़ा खोलते ही चिल्लाया "मम्मी ..... कामवाली आंटी बोल गई हैं की वो आज छुट्टी करेंगी"
मारे खुशी के आंसू आ गए ..इससे बेहतर सन्डे हो ही नही सकता कभी भी .

teacher ki aap biti......
जवाब देंहटाएंmai god se prathna krunga kbhi bhi aysa na ho aapki lyf mai aapki kya kisi ki bhi lyf ,mai nahi hone chaiye...........
aap to bddi strong hai.. aapse jyada aapka beta or aapke ptidav jo aapki drd sunte hi ftaft. dr ke pass le gye..
ab kbhi drd nahi hoga raat ko brsh kr ke sona..
or is sunday chale jaana lala ji ki kchori aalu vali khaaneeeeeeeeee
HA HA HA, MAI BHI IS DARD SE GUJRA HU TO TUMHARA HAAL JANTA HU KI DIL PAR KYA GUJAR RAHI HOGI..
जवाब देंहटाएंACHHA VYANGYA LIKHI HO PAR JO BLOG PAHLE THA PHOOLON NAAM SE USIME POST KARTI, YE NAYA Q BANA LI?
KHAIR, KOI REASON HOGA, KAFI DIN BAAD KOI ARTICLE PADHNE KO MILA TUMHARA, ACHHA LAGA, LIKHTI RAHA KARO, ACHHA LIKHTI HO..
आप का ब्लाग बहुत अच्छा लगा। बहुत ही सुन्दर रचना!
जवाब देंहटाएंमैं अपने तीनों ब्लाग पर हर रविवार को ग़ज़ल,गीत डालता
हूँ,जरूर देखें।मुझे पूरा यकीन है कि आप को ये पसंद आयेंगे।
hahahaha....yaar its too gud maza aa gya..yup i can understand kya haaal hoga tera..par teri aapbeeti padkar..sach maza bohot aaya...hahaha
जवाब देंहटाएंi must say u r a blessed writer..u hv given a spark to ur story through ur words..
keep going...god bless u:)
Dhanyavaad mujhe hasane ke liye :)
जवाब देंहटाएंAaj ki bhaag daud waali zindagi me kuch time hasne me nikal gaye aaj apke dant k dard k wajah se ;)
Keep writin and don't forget to visit back my blog and comment :::
http://sourav-pandey.blogspot.com/2009/04/heaven-and-backstill-mesmerized.html
Dhanyawaad Awll Frndz...
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंhey thanks for droppin by my blog...
जवाब देंहटाएंwell i don realli understand much of hindi, but reading the first few lines its bout tooth ache.. i guess.. well what i can say is its painful not only to the body but also to the wallet....burns a big hole!!!!
Bahot accha tha...bahot dino ke baad aisa post padh kar has pada hoon mai...
जवाब देंहटाएंDhanyawad
Gururaj
www.thekoolestblogger.blogspot.com
"अरे कुछ नही होगा में नम्बर ले लेता हु डेंटिस्ट का तुम तैयार हो जाओ!!"हमारे इकलोते पति ने तसल्ली दी।
जवाब देंहटाएंवाह पढ्कर मज़ा आ गया. बेशक आपको तकलीफ़ सहनी पडी पर हम तो चटखारे लेकर पढ रहे है.